सच्चे वीर पुरुष धीर, गम्भीर और आजाद होते हैं। उनके मन की गम्भीरता और शान्ति समुद्र की तरह विशाल और गहरी या आकाश की तरह स्थिर और अचल होती है। वे कभी चंचल नहीं होते।
रामायण में बाल्मीकि जी ने कुम्भकर्ण की गाढ़ी नींद में वीरता का एक चिह्न दिखलाया है। सच है, सच्चे वीरों की नींद आसानी से नहीं खुलती। ये सत्वगुण के क्षीर समुद्र में ऐसे डूबे रहते हैं कि इनको दुनिया की खबर ही नहीं होती।
वे संसार के सच्चे परोपकारी होते हैं। ऐसे लोग दुनिया के तख्ते को अपनी आँख की पलकों से हलचल में डाल देते हैं। जब वे शेर जागकर गरजते हैं, तब सदियों तक इनकी आवाज की गूँज सुनाई देती है।
अवतरण के अनुसार सच्चे वीर के मन की गम्भीरता कैसी होती है?
Aपहाड़ की तरह ऊँची और पानी की तरह तरल
Bसमुद्र की तरह विशाल और आकाश की तरह स्थिर
Cहवा की तरह अमूर्त और आग की तरह ज्वलनशील
Dबर्फ की तरह शीतल और चीनी की तरह मीठी
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