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संसार में धन कमाना सब कुछ नहीं हो सकता, मनुष्य का कर्म और व्यवहार ही उसकी असली पहचान है। धन की पूजा बहुत कम ही जगहों पर होती है और वह भी केवल दिखावा मात्र ही है।

संसार का इतिहास देखा जाए और उदाहरण ढूँढे जाएँ तो यह सत्य स्पष्ट दिखाई देगा कि असल में जिनके लिए हम आँखें बिछाते हैं अथवा जिनके स्मारक बनवाते हैं, उन्होंने रुपया कमाने में अपना जीवन न बिताकर कुछ ऐसे कार्य किए जिससे देश को उनपर गर्व हुआ तथा उनके कार्य का महत्त्व रुपये से अधिक मूल्यवान माना गया। जिन भी लोगों के जीवन का उद्देश्य केवल धन बटोरना रहा, ज्यादातर स्थितियों में लोगों ने उनको पूछा तक नहीं।

जन्म लेकर, रुपया कमाकर वे मर गए पर किसी ने जाना भी नहीं कि वे थे कौन और उनका इतिहास क्या है। मनुष्य समाज कितना भी स्वार्थी हो पर अंत में याद उन्हें ही रखता है जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान करते समय मनुष्यता को केन्द्र में रखा है। राजा भी प्रजा को वही प्यारा है जिसे जनता के मन के भाव की समझ है। इतिहास में देखें तो राम और कृष्ण 'जनता के राजा' हैं जबकि स्वयं को 'लॉर्ड' कहने वाले अनेक राजाओं को जनता ने भुला दिया।

उपर्युक्त 'अनुच्छेद' का सबसे सटीक शीर्षक लिखिए।

Aधन उपार्जन
Bव्यापार उन्नति
Cमनुष्यता
Dस्मारक निर्माण
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