शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में रचनावादी (constructivist) उपागम पर शिक्षा के सभी स्तरों पर बल दिया जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सी विधि मुख्यतः इस उपागम पर आधारित है?
योजना विधि पूर्णतः रचनावादी दृष्टि पर टिकी है कि अधिगमकर्ता वास्तविक संदर्भ में उद्देश्यपूर्ण, स्व-निर्देशित क्रिया द्वारा ज्ञान का निर्माण करता है।
रचनावाद मानता है कि अधिगमकर्ता नए अनुभव को पूर्वज्ञान से जोड़कर सक्रिय रूप से अर्थ गढ़ता है, यह दृष्टि पियाजे, वायगोत्स्की और ब्रूनर से विकसित हुई।
योजना विधि को जॉन डूई के विचारों से विलियम किलपैट्रिक (William Kilpatrick) ने व्यवस्थित किया, जिसमें विद्यार्थी वास्तविक कार्य की योजना बनाकर, करके और आँककर सीखता है।
व्याख्यान विधि शिक्षक-केंद्रित संप्रेषण है जहाँ अधिगमकर्ता निष्क्रिय श्रोता होता है, जो ज्ञान-निर्माण के विपरीत है।
परिचर्चा विधि संवाद से समझ बनाती है पर वह प्रायः निर्देशित रहती है और योजना विधि जैसी व्यक्तिगत हस्तचालित रचना को केंद्र में नहीं रखती।
किलपैट्रिक ने योजनाओं को रचनात्मक, सौंदर्यात्मक, समस्यात्मक और अभ्यास प्रकारों में बाँटा, जो सभी छात्र के अपने उद्देश्य से संचालित होते हैं।
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