अधिगम प्रक्रिया में 'वैयक्तिक भिन्नताओं' को सबसे कम महत्त्व किसमें दिया जाता है?
आदर्शवाद वैयक्तिक भिन्नताओं को सबसे कम महत्त्व देता है, क्योंकि इसका लक्ष्य सभी मनों के लिए समान सार्वभौमिक, परम और आध्यात्मिक सत्य है।
यह शाश्वत विचारों और मूल्यों पर बल देता है, अतः व्यक्तिगत भिन्नता की परवाह किए बिना हर अधिगमकर्ता हेतु वही उच्च लक्ष्य रखे जाते हैं।
प्रकृतिवाद, जिसके प्रवर्तक रूसो हैं, बाल-केंद्रित है और शिक्षा को प्रत्येक बच्चे की अपनी प्रकृति व गति के अनुसार गढ़ता है।
यथार्थवाद अधिगम को बाह्य जगत और इंद्रियों पर आधारित करता है, फिर भी भिन्न अवलोकन-क्षमताओं को स्थान देता है।
व्यवहारवाद, जिसके प्रवर्तक डूई हैं, वैयक्तिक अनुभव और क्रिया पर केंद्रित है और प्रत्येक अधिगमकर्ता की भिन्नताओं को अत्यधिक महत्त्व देता है।
प्लेटो और फ्रोबेल जैसे आदर्शवादी विचारक शिक्षा को व्यक्तिगत विशिष्टता के बजाय सार्वभौमिक आदर्शों की प्राप्ति की ओर ले जाते हैं।
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