सूची I को सूची II के साथ सुमेलित कीजिए:
प्रतिरूपण (i) किसी विशेषज्ञ के प्रदर्शन का अवलोकन है (b), जिसमें अधिगमकर्ता देखता है कि कुशल व्यक्ति कार्य कैसे करता है।
प्रशिक्षण (ii) अभ्यास के दौरान संकेत, प्रतिपुष्टि तथा अनुस्मारक के रूप में बाह्य सहारा देना है (d)।
मचान (iii) अधिगमकर्ता को सहारा बताकर तथा दक्षता बढ़ने पर उसे धीरे धीरे हटाकर सहायता करना है (a)।
अभिव्यक्ति (iv) प्रक्रिया तथा विषयवस्तु की अपनी समझ को शब्दों में व्यक्त करना है (c), जिससे अंतर्निहित तर्क स्पष्ट होता है।
ये सभी जटिल कौशलों के शिक्षण हेतु संज्ञानात्मक शिक्षुता (cognitive apprenticeship) ढाँचे की विधियाँ हैं।
Collins, Brown तथा Newman ने संज्ञानात्मक शिक्षुता प्रस्तुत की, जो पारंपरिक शिक्षुता को संज्ञानात्मक कार्यों तक विस्तृत करती है।
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