शिक्षण-विधियों का कौन-सा संयोजन अधिगमकर्ता-केंद्रित प्रतिमान को प्रोत्साहित करेगा?
योजनाएँ और प्रत्यक्ष अनुभव अधिगमकर्ता को सक्रिय अन्वेषक बनाते हैं, इसलिए यह संयोजन अधिगमकर्ता-केंद्रित प्रतिमान को सर्वाधिक बढ़ावा देता है।
वैयक्तिकृत अनुदेशन और व्याख्यान एक अधिगमकर्ता-केंद्रित विधि को शिक्षक-केंद्रित विधि से मिला देते हैं।
अनुकरण और प्रदर्शन में प्रदर्शन अधिकांशतः शिक्षक द्वारा दिखाया जाता है, जिससे अधिगमकर्ता दर्शक बने रहते हैं।
व्याख्यान और प्रयोग में व्याख्यान शिक्षक-केंद्रित है और अधिगमकर्ता के नियंत्रण को घटाता है।
योजना विधि (project method) अधिगमकर्ताओं द्वारा किए सोद्देश्य वास्तविक-जीवन कार्यों से ज्ञान गढ़ती है।
जॉन ड्यूई का करके सीखने (learning by doing) का सिद्धांत इस अनुभव-आधारित, अधिगमकर्ता-केंद्रित उपागम का आधार है।
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